-कार्य को सफल बनाने के सबसे आसान तरीके -
क्या करूँ ? क्या न करूँ ?और जो करना चाहता हूँ क्या वो सही ही होगा। क्या मैं अपनी जिंदगी में वो सब कुछ कर पाउँगा जो कुछ भी मई चाहता हु, ये सब प्रश्न इस दुनिया में मौजूद हर अंतरात्मा में उठते रहते है। लेकिन यह प्रश्न उस अंतरात्मा उस व्यक्ति को ज्यादा परेशां करते हैं ,जो पहले से ही परेशान होता है।
दोस्तों।, ये सारे प्रश्न हमारे मन में तब ज्यादा घर बना लेते हैं ,जब हम कुछ गलत काम कर देते है ,या गलत रास्ते पर जा रहे होते है। और हमको इस गलत रस्ते के बारे में पूरी जानकारी होती है ,और फिर भी हम अनजान बनने की कोशिश करते रहते है।
दोस्तों किसी रास्ते पर चलना गलत नहीं होता ,चाहे रास्ता बुराई का हो या अच्छाई का। क्योकि यदि रास्ता अच्छाई का होगा तो वो हमें मंजिल तक पहुँचा देगा। और यदि रास्ता बुराई का होगा तो उस रस्ते से हमें बहुत साडी चीजे सीखने को मिल जाएगी। और जिस रास्ते से बहुत कुछ सीखने को मिल जाये वो रास्ता हमारी पूरी जिंदगी भर के लिए फायदेमंद हो जाता है। CHANKYA KE MAHAN VICHAAR.-CLICKHERE
जो रास्ते पर आप चलना चाहते हो ,और आपकी अंतरात्मा से आवाज़ आती है की हाँ ये रास्ता मेरे लिए perfect है ,तो फिर मत सोचो कुछ भी,और एक क्रमबद्ध योजना बनाकर द्रढ़ विश्वास से उसी रस्ते पर निकल पड़ो।
किसी भी कार्य को पूरा करने में इन तीन चीजों को पूरी जी जान से लगा दो ,सफलता जरूर मिलेगी -
सफलता के तीन मूल मंत्र -
1 -कार्य को पूरा करने की योजना।
2-अपनी बनायीं गयी योजना पर द्रढ निश्चय।
3 -आत्मविश्वास।
दोस्तों आप जो भी कार्य करना चाहते हो ,सबसे पहले आपको आपको उस कार्य को पूरा करने के लिए एक योजना बना लेनी चाहिए ,और जो भी योजना बनाये ,उसी योजना को दृढ निश्चय करके पुरे आत्मविश्वास के साथ अमल में लाये। दोस्तों ऐसा करने पर सफलता शतप्रतिशत आपके कदम चूमेगी।
दोस्तों आत्मविश्वास एक बहुत बड़ी चीज होती है ,पूरे जीवन में जितनी भी कठिनाइयां आपके जीवन मेआयी होगी और आप उन कठिनाइयों से जूझकर निकले ,तो उन सब कठिनाइयों से लड़ने के लिए हौसला आपके आत्मविश्वास ने दिया और किसी ने नहीं।
आत्मविशवास शब्द का मतलब होता है -
आत्म+विश्वास =स्वयं का भरोसा
दोस्तों आत्मविश्वास का मतलब होता हैं,स्वयं का भरोसा। आप कोई भी काम करने जाए ये चीज सबसे ज्यादा FACT करती है ,की आपका इस काम को करने में स्वयं का भरोसा कितना है ,यदि आपको पूरा भरोसा है किम यही कार्य आपके लिए सही है ,तो दोस्तों ,फिर आपको किसी से अनुमति लेने की जरूरत नहीं है,की ये कार्य मुझे करना चाहिए ,या नहीं।
यदि आपका उस कार्य पर भरोसा ही नहीं ,तो फिर आप दूसरो से भी कुछ भरोसा नहीं करिये।
यदि आप कार्य पर भरोसा नहीं करेंगे , तो कार्य भी आप पर भरोसा नहीं करेगा। दोस्तों किसी एक हि चीज की पूरी अंतरात्मा से चाह लो ,तो पूरी कायनात किसी न किसी तरह से आपको मददगार लगने लगेगी। हर कोई आपकी मदद करेगा। यदि आप अपने कार्य को बेहतरीन तरीके से आगे बढ़ाना चाहते हो और आपको लगता है की हाँ यही मेरी फील्ड है ,जहाँ मुझे कार्य करना चाहिए तो फिर आप उसी फील्ड पर ही लग जाइये।
"आत्मविश्वास किसी भी कार्य को पूरा करने की, सबसे अच्छी कुंजी है। "
अंत में कुछ लाइने पेश करना चाहता हूँ -:
"हे !मेरे परम पिता परमात्मा ,
तुम ही मेरे कर्ता ,
तुम ही मेरे धर्ता ,
शक्ति दो मुझे इतनी ,
की पल पल शुद्ध रहे मेरी आत्मा।
हे !मेरे परम पिता परमात्मा ,
इस श्रष्टि में न है तुमसे बड़ी कोई धर्मात्मा।
हे! मेरे परम पिता परमात्मा ,
शक्ति दो मुझे इतनी की ,
पल पल स्वच्छ रहे मेरी आत्मा।
गलत मार्ग को मै समझ सकूँ,
सही मार्ग पर सदा चलता रहूं ,
गर गिर गया तो उठ सकूँ ,
और उठ कर फिर से लड़ सकूँ।
हे !मेरे परम पिता परमात्मा ,
शक्ति दो मुझे इतनी
की निर्मल हो जाए मेरी आत्मा। "
धन्यवाद
मस्ट रीड -
HOW TO BE A GOOD PLAYER OF LIFE#HINDI MOTIVATIONAL THOUGHT_"
Reviewed by satendra singh
on
19 दिसंबर
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