- चाणक्य के २० महान विचार -
१ -विपत्ति निवारण के लिए हमेशा धन की रक्षा कर के रखना चाहिए ,
क्योकि बड़े से बड़े और हर महान आदमी को एक न एक दिन विपत्ति जरूर आती है।
२ -जीविका, भय, लज्जा ,कुशलता, देने की प्रकृति जहाँ ये पांच नहीं वहाँ के लोगो के साथ संगती नहीं करनी चाहिए।
3 -पुरुष से स्त्रियों का आहार दूना ,लज्जा चौगुनी,साहस छै गुना ,और काम आठ गुना अधिक होता है।
4 -मन से सोचे हुए काम का प्रकाश वचन से न करे ,मन ही मन उसको पनपने दे और गुप्त रूप से उस कार्य में लग जाये।
5 -दुर्जन और सर्प इनमे सर्प अच्छा है दुर्जन नहीं , क्योकि सर्प तो एक बार काटेगा लेकिन दुर्जन पग पग पर काटेगा।
6 -किसी भी चीज में अति न करे ,क्योकि अति सुंदरता के कारन सीता हरी गयी ,अति गर्व के कारन रावण मारा गया ,इस हेतु अति को सभी जगह छोड़ देना चाहिए।
7 -भयो से तब तक ही डरना उचित है ,जब तक भय नहीं आया ,और आये हुए भय पर तुरंत प्रहार करना चाहिए।
8 -विदेश में विद्या ही आपकी सबसे बड़ी मित्र है। घर में आपकी भार्या आपकी सबसे बड़ी मित्र है।
९-पक्षियों में कौवा ,पशुओ में कुत्ता ,मुनियो में पाप ,चांडाल के समान होता है ,और इन सबमे सबसे बड़ा चांडाल दुसरो की बुराई करने वाला होता है।
10 -लोभी को धन से ,अहंकारी को हाथ जोड़ने से ,मूर्ख को उसके अनुसार बरतने से ,और ग्यानी व्यक्ति को सच्चाई से वश में करना चाहिए।
11 -कार्य यदि करने लायक हो तो कार्य छोटा हो या बड़ा उसे हर पारकर से प्रयत्न करके करना चाहिए।
12 -इन्द्र्रियो पर संयम करके अपने बल व विद्या को समझकर हर कार्य को अच्छे से करना चाहिए।
13 -धन का नाश ,मन का ताप, ग्रहणी का चरित्र नीच का वचन और अपमान इन सब को बुद्धिमान लोग ज्यादा ध्यान न देवे।
14 -अपनी स्त्री ,भोजन ,और धन इन टेनो में संतोष कर लेना चाहिए ,जबकि पढ़ना ,जप और दान इन तीनो में कभी संतोष नहीं करना चाहिए।
१५ -दो ग्यानी ,ज्ञानी व्यक्ति और अग्नि ,स्त्री पुरुष ,हल और बैल इनके बीच में से होकर कभी नहीं गुजरना चाहिए।
16 -अत्यत्न सीधे बनकर कभी नहीं रहना चाहिए क्योकि वन में जाकर देखो ,हमेशा सीधे वृक्ष ही कटे जाते है ,जबकि टेढ़े मेढ़े खड़े रहते है।
17 -जैसे फूल में गंध ,तिल में तेल,दूध में घी ,वैसे ही आत्मा को शरीर में विचार कर के देखो।
18 -बुढ़ापे में मरी स्त्री ,बंधू के हाथ में गया धन ,हुए दुसरो के अधीन भोजन ये तीनो व्यक्ति की विडंबना है अर्थात दुखदायक होते है।
19 -संसार में हमेशा बुद्धिमान की ही प्रशंशा होती है और वही सब स्थानों में आदर पाता है।
20 -हमेशा अपने आप को ताकतवर और विषैले सर्प की तरह दिखाकर रखना चाहिए क्योकि विष हो या न हो उसका आडम्बर ही भयानक होता है।
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धन्यवाद्
BEST THOGHTS OF CHANKYA IN HINDI- MOTIVATIONAL THOUGHTS.
Reviewed by satendra singh
on
03 दिसंबर
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