- "किसी भी परिस्थति में सदा एक जैसे रहना - " PERSNOLITY डेवॅलप के लिए सबसे जरुरी पॉइंट है।
दोस्तों, आज मै आपके सामने एक ऐसी विचारधारा प्रस्तुत करने जा रहा हु ,जिसमे सुख और दुःख की अवस्था में कोई फर्क नहीं है।
हम देखते और महसूस करते आ रहे है ,की हमारे दिल और दिमाग पर मात्र दो ही अवस्थाओं का पहरा रहा है,
पहली अवस्था है सुख की अवस्था और दूसरी दुःख की।
जब हम सुख की अवस्था में होते है तब हमारा शरीर उत्तेजित होता है ,हर काम करना हमको अच्छा लगता है ,
क्योकि सुख की अवस्था में हम सिर्फ ख़ुशी का अनुभव करते है।
और यह ख़ुशी की अवस्था ऐसी होती है , जिसे हम कभी खोना नहीं चाहते।
अब बात आती है दूसरी अवस्था यानि दुःख की अवस्था -
क्या आपने कभी सोचा है की आखिर दुःख क्या है ?, यह कहा से आता है ?, क्यों आता है ? और आटा है तो बार बार क्यों आता है ?
दोस्तों जब मैंने गहराई से इस बारे में सोचा तो पता चला की सुख दुःख का जोड़ा तो है लेकिन ये सुख और दुःख हमारे ही द्वारा बनाये गए है। क्योकि यदि सुख है तो दुःख भी इस दुनिया में कही न कही जरूर है ,इस बात को कोई झुठला नहीं सकता लेकिन जब पर गौर किया की यह दुःख आता कहा से है ,तब पता चला की यह दुःख की अवस्था कोई और नहीं, कही और से नहीं आती ,बल्कि इस दुःख की अवस्था को लेन के लिए हम स्वयं जिम्मेदार होते है और यह अवस्था हमारे ही अंदर से आती है। बस हमने एक धारणा बना ली है, की हे भगवन इस दुनिया में बहुत दुःख है, कोई अच्छा नहीं है, सब मतलबी है।
लेकिन ऐसा कुछ नहीं है मेरे दोस्त ये दुनिया वैसी ही दिखती है जैसी तुम देखना चाहते थे या हो।
दुःख आने का सबसे बड़ा कारन हमारे दिमाग के अंदर की मौजूद ख़ुशी ,है ,
जी हाँ हमारे दिमाग के अंदर की ख़ुशी , क्योकि आपको यह ख़ुशी की अवस्था,यह सुख की अवस्था इतनी अच्छी लगने लगी है की हम इससे अलग नहीं होना चाहते ,हम उसी अवस्था को कसकर पकडे रहना चाहते है ,
लेकिन दोस्तों मैंने बताया है कि , सुख और दुःख एक ही सिक्के के दो पहलू है आपके पास यदि आज सुख है तो कल दुःख भी आएगा।
लेकिन ये जो दुःख नाम का शब्द है असलियत में ऐसी कोई अवस्था होती ही नहीं है ,
यह सब सोच हमारे दिमाग पर निर्भर है ,हमारा दिमाग जब हमारी सोची हुई चीजों के अनुरूप काम नहीं करता है तो हमें लगता है की अब दुःख आ गया लेकिन दोस्तों ऐसा कुछ नहीं होता।
जब आप बहुत खुश हो और अचानक से ऐसी खबर आ जाये जो आपको अंदर से तोड़ने लगे तब अपनी विचारधारा का परिवर्तन करना सबसे बड़ा दुःख है।
कोई भी अवश्था हो अपने आप को हमेशा एक जैसा रखो दिमाग पर जोर डालो और कहो की सुख दुःख कुछ नहीं होता यह तो प्रकृति का नियम है मेरे साथ हमेशा परमात्मा है इसीलिए मेरे साथ कभी कुछ गलत नहीं हो सकता आप हर अवस्था में एक जैसा रहना सीखो ,कही भी सुख दुःख नहीं है ,सोच को बदलिए ,हमेशा स्वभाव को शांतचित्त रखिये ,अंदर ही अंदर मनन कीजिये ,परमात्मा कभी किसी के साथ कुछगलत नहीं करता क्योकि जो भी आपको गलत लगता है ,उसको भी ध्यान से समझने की कोशिश करो उस गलत स्थति को समझो की वह कैसे आयी और क्यों आयी ? और आयी तो इससे मैं अपना फायदा कैसे निकाल सकता हूँ।
दोस्तों एक अच्छा स्टूडेंट हो या एक नौकरीपेशा व्यक्ति या फिर एक बिजनेसमैन सभी का एक एक पल बहुत कीमती तो होता ही है ,बस उन पलो को और कीमती बनाने की कोशिश करो ,और इतना ज्यादा कीमती बनाने की कोशिश करो की आपके पालो को कोई खरीदने की कोशिश न कर सके।
हर स्थति को ,हर अवस्था को अपने अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करो। उसमे अपनी अच्छाइयाँ ढूढो ,अपने फायदे निकालो।
यदि आपने ऐसा कर दिया तो आपने सुख दुःख में कोई फ़र्क़ महसूस नहीं होगा और आप हर फलिंग ,हर अवश्था को एन्जॉय करने लग जाओगे। ये मेरा आपसे दावा है।
और एक आखिरी बात इसे आप अपने जीवन में भी उतार सकते है -
लेकिन ये जो दुःख नाम का शब्द है असलियत में ऐसी कोई अवस्था होती ही नहीं है ,
यह सब सोच हमारे दिमाग पर निर्भर है ,हमारा दिमाग जब हमारी सोची हुई चीजों के अनुरूप काम नहीं करता है तो हमें लगता है की अब दुःख आ गया लेकिन दोस्तों ऐसा कुछ नहीं होता।
जब आप बहुत खुश हो और अचानक से ऐसी खबर आ जाये जो आपको अंदर से तोड़ने लगे तब अपनी विचारधारा का परिवर्तन करना सबसे बड़ा दुःख है।
कोई भी अवश्था हो अपने आप को हमेशा एक जैसा रखो दिमाग पर जोर डालो और कहो की सुख दुःख कुछ नहीं होता यह तो प्रकृति का नियम है मेरे साथ हमेशा परमात्मा है इसीलिए मेरे साथ कभी कुछ गलत नहीं हो सकता आप हर अवस्था में एक जैसा रहना सीखो ,कही भी सुख दुःख नहीं है ,सोच को बदलिए ,हमेशा स्वभाव को शांतचित्त रखिये ,अंदर ही अंदर मनन कीजिये ,परमात्मा कभी किसी के साथ कुछगलत नहीं करता क्योकि जो भी आपको गलत लगता है ,उसको भी ध्यान से समझने की कोशिश करो उस गलत स्थति को समझो की वह कैसे आयी और क्यों आयी ? और आयी तो इससे मैं अपना फायदा कैसे निकाल सकता हूँ।
दोस्तों एक अच्छा स्टूडेंट हो या एक नौकरीपेशा व्यक्ति या फिर एक बिजनेसमैन सभी का एक एक पल बहुत कीमती तो होता ही है ,बस उन पलो को और कीमती बनाने की कोशिश करो ,और इतना ज्यादा कीमती बनाने की कोशिश करो की आपके पालो को कोई खरीदने की कोशिश न कर सके।
हर स्थति को ,हर अवस्था को अपने अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करो। उसमे अपनी अच्छाइयाँ ढूढो ,अपने फायदे निकालो।
यदि आपने ऐसा कर दिया तो आपने सुख दुःख में कोई फ़र्क़ महसूस नहीं होगा और आप हर फलिंग ,हर अवश्था को एन्जॉय करने लग जाओगे। ये मेरा आपसे दावा है।
और एक आखिरी बात इसे आप अपने जीवन में भी उतार सकते है -
"बर्फ कभी गर्म नहीं होती जब तक कि वो बाहरी गर्मी से पिघल न जाये ".
अपने आप को हमेशा मजबूत रखो बहरी स्थतियो से मत डरो क्योकि प्रकृति है ही ऐसी।
"अपने आप को हमेशा अंदर से एक जैसा रखो "
धन्यवाद्
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KAISE BANE EK BEHTAR PERSONALITY-ORIGINAL DUNIYA MOTIVATINOL THOUGHTS
Reviewed by satendra singh
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30 नवंबर
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